A Sacred Path of Devotion, Meditation & Spiritual Awakening
🕉️ आरती प्रत्येक रविवार दोपहर 3:00 बजे
🕉️ प्रत्येक गुरुवार शाम 7:30 बजे
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बाल्यावस्था और कौतूहल: पूज्य गुरुदेव के भीतर आध्यात्मिक चेतना का बीजारोपण मात्र 10 वर्ष की अल्पायु में ही हो गया था। सत्य को जानने और ईश्वर को महसूस करने की तीव्र जिज्ञासा के कारण, आप बचपन में हर प्रकार की पूजा-पद्धतियों, मंत्रों और साधनाओं का स्वयं प्रयोग करके देखते थे। यह खोजी और वैज्ञानिक प्रवृत्ति आगे चलकर गहन साधना के मार्ग में बदल गई।
गृहस्थ आश्रम में योग साधना: गुरुदेव ने समाज को दिखाया कि अध्यात्म के लिए संसार या कर्म का त्याग आवश्यक नहीं है। आप पूर्ण रूप से गृहस्थ आश्रम (पारिवारिक जीवन) में रहते हैं। आपकी अर्धांगिनी आदरणीय गुरुमाता आस्था जी इस आध्यात्मिक यात्रा में संबल बनकर साथ रहीं।
महावतार बाबा जी का आदेश एवं शक्तिपात: युवावस्था में गुरुदेव को योग्य आध्यात्मिक सद्गुरु का सानिध्य प्राप्त हुआ। सद्गुरु-कृपा से आपके भीतर की सुप्त ऊर्जा जाग्रत हुई। पूज्य गुरुदेव इस धरा पर 'महायोगी महाअवतार बाबा जी' के दिव्य आदेश से संसार को एक नई चेतना और विशिष्ट शक्ति देने आए हैं। पिछले 31 वर्षों से गुरुदेव निरंतर साधकों का शक्तिपात दीक्षा (Shaktipat Meditation) के माध्यम से शक्ति-जागरण कर रहे हैं।
आडंबर रहित एकांत साधना और मर्यादा: सिद्ध योग शक्ति दरबार बरेली किसी भी प्रकार के व्यावसायिक प्रचार-प्रसार या बाह्य प्रदर्शन से सर्वथा दूर रहता है। यही कारण है कि पूज्य गुरुदेव और दरबार की ओर से बाहर जाकर सार्वजनिक कार्यक्रम बहुत ही सीमित मात्रा में किए जाते हैं। दरबार अपनी मूल मर्यादा और शांत साधना पद्धति पर ही केंद्रित रहता है। इसके बावजूद, पिछले 31 वर्षों के लंबे साधना काल में, विशेष आध्यात्मिक लोक-कल्याण के उद्देश्यों से प्रेरित होकर गुरुदेव ने देश के विभिन्न स्थानों पर अत्यंत विशिष्ट कार्यक्रमों को संपन्न किया है।
सिद्ध योग शक्ति दरबार बरेली के पीठाधीश्वर पूज्य सिद्धगुरु श्री गोविंद जी महाराज महान उद्धारक संत हैं, जो अपनी दिव्य साधना पद्धति—'ध्यान, मंत्र जप और हवन' द्वारा हज़ारों साधकों को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ा चुके हैं। साधना करने के इच्छुक साधकों को शक्तिपात (Shaktipat Meditation) देकर बहुत ही अल्प समय में उच्चकोटि के आध्यात्मिक अनुभव करा रहे हैं। साधक साधना के दौरान दिव्य ज्योति दर्शन, अनहत नाद, नीला प्रकाश एवं सूक्ष्म शरीर के प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करते हैं।
सिद्धगुरु श्री गोविंद जी का स्पष्ट मानना है कि आत्मज्ञान के सभी अधिकारी हैं; बस उसे जानने और साधना करने की परम जिज्ञासा होनी चाहिए। आपने परम गुप्त विद्याओं और मन्त्रों को सर्वजन कल्याण हेतु सहजता से सुलभ कराया है। युवावस्था में ही आपने मंत्र-तंत्र, योग, ज्योतिष, ध्यान तथा विविध सिद्धियों का गहन ज्ञान प्राप्त किया। परंतु 'आत्मज्ञान' को सर्वोपरि मानते हुए आपने ईश्वर साक्षात की साधना को ही अपना जीवन लक्ष्य बनाया।
माँ बगलामुखी, माँ काली, माँ सरस्वती, माँ लक्ष्मी (श्री विद्या) और बालरूप बाबा बटुकनाथ की कृपा प्राप्त होने के उपरांत, उत्तराखंड (रानीखेत) के वनों में ज्ञानगंज के महातपस्वी महायोगी महावतार बाबा जी ने पूज्य गुरुदेव को दिव्य संदेश देकर ब्रह्मांडीय शक्तियों का समावेश किया और जगत् कल्याण का संकल्प दिया। गुरुदेव आडंबर और बाह्य प्रदर्शन से सर्वथा दूर रहकर केवल शुद्ध भक्ति और अंतर-साधना पर बल देते हैं।
सिद्ध योग (Siddh Yog) एक ऐसा महासागर है जिसमें सभी योग और साधनाएँ (कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, राजयोग) स्वतः समाविष्ट हो जाती हैं। सिद्धगुरु की असीम कृपा से साधक के शरीर की 72,000 नाड़ियों का शोधन होकर सातों चक्रों में गति प्रारंभ होती है और सुप्त कुंडलिनी शक्ति का जागरण (Kundalini Jagran) सहज रूप से होने लगता है।
मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें तंत्र-मंत्र, वाक-शक्ति, विजय और स्तंभन की देवी माना जाता है। सनातन परंपरा और शक्ति साधना में मां बगलामुखी का अत्यंत विशेष और प्रभावशाली स्थान है।
मां बगलामुखी की साधना से साधक को जीवन में अद्वितीय शक्तियां और फल प्राप्त होते हैं:
मां की सबसे प्रमुख शक्ति 'स्तंभन' है। इसका अर्थ है विरोधी या नकारात्मक शक्तियों को वहीं रोक देना—चाहे वह शत्रु की चाल हो, रोग हो, या मानसिक भय।
इनकी कृपा से साधक की वाणी में प्रभाव आता है। यह साधना न्यायशास्त्र, वाद-विवाद, और मुकदमों (कोर्ट-कचहरी) में सफलता दिलाने के लिए अचूक मानी जाती है।
मां बगलामुखी अपने साधकों की हर प्रकार के तंत्र-मंत्र, अभिचार कर्म, और दृश्य-अदृश्य शत्रुओं से रक्षा करती हैं।
विशेषकर गुरु (बृहस्पति) और मंगल ग्रह से जुड़े दोषों के शमन के लिए मां पीतांबरा की साधना अत्यंत फलदायी होती है।
तंत्र और योग परंपरा में मां बगलामुखी की साधना को 'सिद्ध विद्या' माना गया है।
यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि आपके 'सिद्धि योग शक्ति दरबार' में मां बगलामुखी की साधना और अनुष्ठान का आयोजन हो रहा है। मां बगलामुखी के अनुष्ठान के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है:
मां बगलामुखी आपके सिद्धि योग शक्ति दरबार के इस पावन अनुष्ठान को सफल बनाएं और सभी साधकों एवं श्रद्धालुओं पर अपनी कृपा बरसाएं! जय मां पीतांबरा!
शक्तिपात सनातन अध्यात्म की वह परम विधा है, जिसमें एक समर्थ सद्गुरु अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, दृष्टि या संकल्प के माध्यम से साधक के भीतर सुप्त कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत कर देते हैं। आज के समय में जहाँ शॉर्टकट से अध्यात्म चलाने वालों की बाढ़ आ गई है, गुरुदेव बिना किसी बाह्य आडंबर या ढोंग के साधकों को केवल अपनी दिव्य उपस्थिति से शक्ति प्रदान कर साक्षात अनुभव कराते हैं।
जो साधक एवं भक्तगण व्यक्तिगत रूप से सिद्ध योग शक्ति दरबार में उपस्थित नहीं हो सकते,
वे गुरुदेव द्वारा संचालित दिव्य Online Shaktipaat Session में भाग लेने हेतु अपना Registration करें।
📌 प्रत्येक माह दो Online Shaktipaat Sessions आयोजित किए जाएंगे।
📌 प्रत्येक Registration पर कुल दो Sessions उपलब्ध होंगे।
Domestic Payment (India)
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अपनी Registration ID नीचे दर्ज करें एवं Get Session Link पर क्लिक करें।
🙏🌺ॐ बटुकाय नमः 🙏🌹
सभी साधकों का धन्यवाद
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